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भारत और ईरान के संबंधों को कोई नहीं मिटा सकता: प्रोफेसर नियाजी

संपादक लक्ष्मी रावत/अनिल रावत

रुड़की।आल इंडिया सूफी संत परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दरगाह जयपुर के सज्जादानशीं प्रोफेसर सैयद हबीबुर्रहमान नियाजी ने ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता सैयद अयातुल्ला खामेनई की शहादत पर दिल्ली स्थित ईरान कल्चर हाउस के प्रभारी व ईरान के धार्मिक पेशवा के प्रतिनिधि डॉ०सैयद अयातुल्ला अब्दुल हकीम इलाही के नाम शोक संदेश पेश करते हुए कहा कि अयातुल्ला सैयद खामनेई “शहीदे इन्सानियत” हैं,वो कभी मर नहीं सकते और कयामत तक इंसाफ पसन्द और इंसानियत पसन्द लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।उन्होंने कहा कि हजरत खामनेई हमारे मुल्क भारत के लिये हमेशा प्रेम,दोस्ती व परस्पर सहयोग का रवैया रखते थे,जो आज भी भीषण युद्ध के दौरान जारी है।प्रोफेसर नियाजी ने कहा कि दुनियाभर के इंसाफ को मानने वाले देशों को खुलकर इस्राइल व अमेरिका की निंदा और बहिष्कार करना चाहिए,क्योंकि दोनों मासूम व बेगुनाहों का खून बहा रहे हैं।आल इंडिया सूफी संत परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया के सज्जादानशीं सैयद अनफाल निजामी ने कहा कि अयातुल्ला खामनेई भारत के प्रति बड़ी श्रद्धा और लगाव रखते थे।अंतराष्ट्रीय शायर व आल इंडिया सूफी संत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अफजल मंगलौरी ने कहा कि खामनेई की हत्या भी सद्दाम हुसैन की तरह झूटी कहानी बना कर मध्य एशिया की खनिज संपदा व तेल पर कब्जा करने के लिए की गई।इस अवसर पर दरगाह रजबपुर के अनवर राशिद फरीदी,सैयद जाफर निजामी,इंजीनियर मोहम्मद असलम,एडवोकेट असगर अली,दरगाह मोहब्बत अली शाह सिकरोडा के सज्जादा नशीन मजाहिर हसन साबरी,अंजुम साबरी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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