मणिकूट पर्वत पर 15 फरवरी को होगी त्रयोदश ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा
महाशिवरात्रि पर ऐतिहासिक अनुष्ठान, मणिकूट धाम बनेगा 12 ज्योतिर्लिंग के एक साथ दर्शनों का केंद्र : हरिओम जी महाराज

संपादक लक्ष्मी रावत
ऋषिकेश। शिव-शक्ति के विश्व में सबसे शुद्ध एवं सिद्ध स्थान मणिकूट पर्वत, ऋषिकेश उत्तराखंड पर आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर त्रयोदश ज्योतिर्लिंग की दिव्य प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस भव्य एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान का आयोजन 13 से 15 फरवरी तक किया जाएगा। यह जानकारी जगतगुरु त्रिपुरा पीठाधीश्वर, चक्रवर्ती यज्ञ सम्राट श्रीश्री 1008 श्री हरिओम जी महाराज ने खैरी खुर्द स्थित शिव-शक्ति कैलाश आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।
हरिओम जी महाराज ने बताया कि राजाजी नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत स्थित मणिकूट पर्वत पर होने वाली इस प्राण प्रतिष्ठा में तेरहवें ज्योतिर्लिंग की स्थापना ‘गुजरेश्वर महादेव’ के रूप में की जाएगी। तीन दिवसीय यह अनुष्ठान सनातन धर्म के अब तक के सबसे दिव्य और दुर्लभ आयोजनों में से एक होगा।
उन्होंने कहा कि मणिकूट पर्वत का उल्लेख शिव पुराण सहित अनेक वेद-पुराणों में मिलता है। यह पर्वत शिव और शक्ति के संगम की अलौकिक ऊर्जा का प्रतीक है। साधु-संत और साधक यहां साधना कर विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। मणिकूट पर्वत विश्व का एकमात्र शिव-शक्ति पर्वत है जिसकी परिक्रमा की जाती है।
हरिओम जी महाराज ने बताया कि मणिकूट पर्वत पर 11 कुंड निरंतर प्रज्ज्वलित रहते हैं, 500 से अधिक बिल्व वृक्षों का विशाल बाग, 11 रुद्रों के प्रतीक रुद्राक्ष वृक्ष, महादेव कुंड का सतत जल स्रोत, द्वादश ज्योतिर्लिंग का अभिषेक इसी जल से, गौशाला, मणिधारी नागों की उपस्थिति तथा माँ त्रिपुर सुंदरी का शक्तिपीठ—इन सभी विशेषताओं के कारण मणिकूट धाम शिव-शक्ति का सबसे शुद्ध व सिद्ध स्थान है।
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शुद्धता सिद्ध करने पर 1.08 लाख रुपये इनाम की घोषणा
यज्ञ सम्राट हरिओम जी महाराज ने घोषणा की कि यदि कोई संत, महात्मा या विद्वान शिव-शक्ति से जुड़ा कोई स्थान मणिकूट धाम से अधिक शुद्ध व सिद्ध प्रमाणित कर दे, तो उन्हें ₹1,08,000 की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।
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अब एक ही स्थान पर होंगे द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन
हरिओम जी महाराज ने कहा कि त्रयोदश ज्योतिर्लिंग प्राण प्रतिष्ठा के बाद मणिकूट धाम में दर्शन करने का वही पुण्य फल प्राप्त होगा, जो अलग-अलग स्थानों पर जाकर द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन से मिलता है। जो श्रद्धालु विभिन्न ज्योतिर्लिंगों तक नहीं जा सकते, वे मणिकूट धाम में एक साथ सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने श्रद्धालुओं से 13 से 15 फरवरी तक मणिकूट पर्वत ऋषिकेश में पहुंचकर इस दिव्य आयोजन में सहभागिता करने का आह्वान किया।



