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एम्स ऋषिकेश में जूनोटिक व वायरल रोगों की पहचान पर राष्ट्रीय कार्यशाला

संपादक लक्ष्मी रावत
ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में “डायग्नॉस्टिक टेक्निक्स–जूनोटिक एवं वायरल पैथोजेन्स” विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों एवं वायरल रोगजनकों की पहचान के लिए आधुनिक डायग्नॉस्टिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में देशभर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से आए एमएससी छात्र, पीएचडी स्कॉलर्स और माइक्रोबायोलॉजिस्टों ने प्रतिभाग किया।
वायरोलॉजी रिसर्च एंड डायग्नॉस्टिक लेबोरेटरी (वीआरडीएल) एवं वन हेल्थ प्रोग्राम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में पीसीआर, एलिसा, बायोसेफ्टी प्रोटोकॉल, लैब आधारित परीक्षण तथा उभरते संक्रमणों की रोकथाम रणनीतियों पर प्रशिक्षण दिया गया। मुख्य अतिथि एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने वन हेल्थ एप्रोच पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक महामारी से निपटने के लिए मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ देखने की आवश्यकता है। यह प्रशिक्षण भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा।
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. प्रतिमा गुप्ता ने कहा कि अत्याधुनिक नैदानिक तकनीकों का यह प्रशिक्षण संक्रामक रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण को मजबूत करेगा। वहीं प्रो. डॉ. योगेन्द्र प्रताप मथुरिया ने बताया कि एम्स की वीआरडीएल प्रयोगशाला पीसीआर व एलिसा जैसी आधुनिक विधियों से लैस है, जिससे रोगजनकों की त्वरित और सटीक पहचान संभव हो पाती है

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