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प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताड़पत्र, भोजपत्र एवं दुर्लभ अभिलेख हमारी समृद्ध ज्ञान परम्परा, सांस्कृतिक विरासत बौद्धिक चेतना के अमूल्य साक्ष्य हैं: मुख्य विकास अधिकारी

संपादक- लक्ष्मी रावत/ अनिल रावत

हरिद्वार! मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र ने अवगत कराया है कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताड़पत्र, भोजपत्र एवं दुर्लभ अभिलेख हमारी समृद्ध ज्ञान परम्परा, सांस्कृतिक विरासत बौद्धिक चेतना के अमूल्य साक्ष्य हैं। इन पाण्डुलिपियों एवं ग्रन्थों आदि का सरंक्षण एवं भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित / संरक्षित एवं हस्तान्तरण करना सामूहिक दायित्व है।
उन्होंने अवगत कराया है कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ भारत की समृद्ध ज्ञान परम्परा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने की भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल है। इस मिशन के अन्तर्गत देश भर में उपलब्ध भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़ी पाण्डुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रन्थों आदि का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है, ताकि यह धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके। उत्तराखण्ड जो प्राचीन ज्ञान दर्शन, साहित्य और संस्कृति की भूमि रहा है, इस अभियान में अग्रणी भूमिका का निर्वहन करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रश्नगत मिशन विकसित भारत @ 2047 के अन्तर्गत डिजिटल इण्डिया के दृष्टिकोण और विरासत और विकास के राष्ट्रीय संकल्प से आच्छादित है।
उन्होंने विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों, मठों, मन्दिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों व व्यक्तियों आदि के पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों, हस्तलिखित ग्रन्थों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों एवं अन्य दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटालॉगिंग, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण कार्य किया जाना है। इस संबंध में उन्होंने सभी से अपेक्षा की है कि यदि किसी के पास पांडुलिपि की प्रति संरक्षित है, संरक्षित छायाप्रति जिला सूचना कार्यालय देवपुरा चौक हरिद्वार को उपलब्ध कराने की अपेक्षा है, जिससे कि पांडुलिपियों को डिजिटाइज्ड किया जा सके। डिजिटाइज्ड पाण्डुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम् पोर्टल’ के माध्यम से आम जन को उपलब्ध कराया जा सके।

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