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स्वामी चिदानन्द सरस्वती, मैथिली शरण, साध्वी  के पावन सान्निध्य में बैकस्टेज सिब्लिंग्स ने की विश्व विख्यात गंगा आरती

भजन जैमिंग, बैकस्टेज सिब्लिंग्स ने बिखेरा स्वरों का जादू

संपादक लक्ष्मी रावत/ अनिल रावत

ऋषिकेश, 12 मार्च। परमार्थ निकेतन के पावन तट पर संगीत और भक्ति का एक अद्भुत संगम हुआ। जेन जेड को भजन क्लबिंग के माध्यम से जोड़ने वाले भजन जैमिंग, बैकस्टज सिब्लिंग्स युवा कलाकार राघव और प्राची ने परमार्थ गंगा आरती में आने भजनों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा गंगा तट उनके दिव्य सुरों से गुंजायमान हो उठा। परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में माँ गंगा की पावन धारा के साक्षी में युवा कलाकार राघव और प्राची की जोड़ी ने अपने अनूठे संगीत से उपस्थित योग साधकों, श्रद्धालुओं और योग जिज्ञासुओं को भक्ति की मधुर लहरियों में डुबो दिया।
उन्होंने पारंपरिक भजनों को आधुनिक संगीत शैली के साथ प्रस्तुत किया गया, जिससे युवा पीढ़ी भी भक्ति के इस पावन प्रवाह में झूमने लगी। “अच्युतम केशवम्”, “हरे राम हरे कृष्ण” हनुमान चालीस, राम राम जय राजा राम जैसे भजनों की स्वर लहरियाँ जब गंगा तट पर गूँजीं, तो उपस्थित सभी भाव-विभोर होकर झूम उठे।


जेन-जेड भजन क्लबिंग के माध्यम से यह प्रयास है कि अपने घरों मे जमीन पर बैठकर कम से कम 20 मिनट पूरा परिवार एक साथ भजन करें तो जीवन में अद्भुत परिवर्तन होता है। भजन जैमिंग एक ऐसा सेतु है, जो आधुनिक युवा संस्कृति को सनातन आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ता है।

बैकस्टेज सिब्लिंग्स की ऊर्जावान प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भक्ति केवल परंपरा नहीं, बल्कि आनंद, उत्साह और आत्मिक जुड़ाव का जीवंत अनुभव है। परमार्थ निकेतन में आयोजित यह भजन जैमिंग संध्या वास्तव में एक आध्यात्मिक उत्सव थी, जहाँ संगीत, साधना और भक्ति ने मिलकर ऐसा वातावरण रचा कि हर हृदय में आनंद, शांति और ईश्वर के प्रति प्रेम की अनुभूति जाग उठी।
पूज्य स्वामी ने बैकस्टेज सिब्लिंग्स राघव व प्राची को रूद्राक्ष का पौधा, अंगवस्त्र देकर उनका अभिनन्दन किया।

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