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डॉ. रवीन्द्र कुमार सैनी द्वारा डॉ. अतुल कृष्ण की आत्मकथा ‘जीवन तरंगिणी’ द्वितीय भाग का अंग्रेज़ी अनुवाद पुस्तक रूप में तैयार, शीघ्र होगा विमोचन

संपादक- लक्ष्मी रावत एवं अनिल रावत

देहरादून। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ. रवीन्द्र कुमार सैनी ने सुभारती समूह के संस्थापक एवं प्रख्यात शिक्षाविद्, समाजसेवी डॉ. अतुल कृष्ण की प्रेरणादायी आत्मकथा ‘जीवन तरंगिणी’ (द्वितीय भाग) का अंग्रेज़ी अनुवाद पूर्ण कर उसे पुस्तक के रूप में तैयार किया है। इस पुस्तक का औपचारिक विमोचन शीघ्र ही किया जाएगा।
डॉ. सैनी ने बताया कि डॉ. अतुल कृष्ण का जीवन संघर्ष, सेवा, शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नैतिक मूल्यों, ईमानदारी, परिश्रम और समाज के प्रति समर्पण के बल पर असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस अंग्रेज़ी अनुवाद का उद्देश्य डॉ. अतुल कृष्ण के प्रेरणादायी जीवन-दर्शन को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अधिक से अधिक पाठकों तक पहुँचाना है, ताकि विद्यार्थी, शिक्षक, शोधार्थी, युवा तथा समाजसेवी उनके अनुभवों और आदर्शों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
डॉ. सैनी ने विशेष रूप से डॉ. अतुल कृष्ण द्वारा संचालित राष्ट्रीय चरित्र निर्माण अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए आदर्श, नैतिक, अनुशासित, संवेदनशील और राष्ट्रभक्त नागरिक तैयार करने का एक व्यापक जनआंदोलन है। “राष्ट्र प्रथम, सदा प्रथम” का इसका मूल संदेश नई पीढ़ी को राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जीवन तरंगिणी’ का अंग्रेज़ी संस्करण पाठकों के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत सिद्ध होगा तथा भारतीय जीवन-मूल्यों, सेवा-भाव, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति के संदेश को विश्व समुदाय तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डॉ. रवीन्द्र कुमार सैनी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि डॉ. अतुल कृष्ण को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर ऊर्जा प्रदान करें, ताकि वे शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक सेवा तथा राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के अपने महान मिशन को निरंतर आगे बढ़ाते रहें।

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